सूकर पालन कैसे करें ?

सूकर पालन कम कीमत पर में कम समय में अधिक आय देने वाला व्यवसाय साबित हो सकता हैं,जो युवक पशु पालन को व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं सूकर एक ऐसा पशु है, जिसे पालना आय की दृष्टि से बहुत लाभदायक हैं, क्योंकि सूकर का मांस प्राप्त करने के लिए ही पाला जाता हैं । इस पशु को पालने का लाभ यह है कि एक तो सूकर एक ही बार में 5 से 14 बच्चे देने की क्षमता वाला एकमात्र पशु है, जिनसे मांस तो अधिक  प्राप्त  होता ही है और दूसरा इस पशु में अन्य पशुओं की तुलना में साधारण आहार को मांस में परिवर्तित करने की अत्यधिक क्षमता होती है, जिस कारण रोजगार की दृष्टि से यह पशु लाभदायक सिद्ध होता है ।

यदि किसान सूकर पालन की शुरुआत करते हैं तो उनके लिए फायदे का सौदा हो सकता है। सूकर  पालन कोई भी किसान कर सकता है। इसके लिए सरकार द्वारा भी सहायता प्रदान की जाती है। इसके मांस में प्रोटीन होने की वजह से इसके मांस की मांग अधिक है। सुअर के मांस को निर्यात कर भी अच्छी आमदनी की जा सकती है।

सूकर का मांस भोजन के रूप में खाने के अलावा इस पशु का प्रत्येक अंग किसी न किसी रूप में उपयोगी है। सूकर की चर्बी, पोर्क, त्वचा, बाल और हड्डियों से विलासिता के सामान तैयार किये जाते हैं। इसे अपनाकर बेरोजगार युवक आत्मनिर्भर हो सकते हैं । अपने देश के बेरोजगार ग्रामीण युवकों, अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए तो सूकर पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय साबित हो सकता है, बशर्ते इस व्यवसाय को आधुनिक एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के साथ अपनाया जाये ।यह व्यवसाय किसानों को रोजगार का एक अवसर देता है इसलिए हम कह सकते हैं कि यह किसानों के लिए फायदे का सौदा है लेकिन इसके लिए आवश्यकता है सही जानकारी की।

सरकार ने भी सुकर पालन से संबंधित प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किये गये है। जिससे लोगों की रूझान इस व्यवसाय की तरफ बढ़तीा जा रही है, सूकर को खरीदने व बेचने के लिए समय-समय पर विभिन्नि क्षेत्रों में मार्केटिंग हार्ट भी लगाये जाते है, सूकर मेलों का आयोजन किया जाता है, जहां उचित मूल्य पर सूकरों का क्रय-विक्रय होता है और सूकर के रोगों की रोकथाम के लिए टीके व कीटनाशक दवाएं दी जाती हैं. देशी सूकर पालना आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद नहीं होता, क्योंकि जहां देशी नस्ल के सूकर का वजन डेढ़ वर्ष की आयु में 35-40 किलोग्राम होता है, वहीं इतनी ही आयु के विदेशी नस्ल के सूकर का वजन 90 से 100 किलोग्राम होता है, जहां देशी नस्ल के नवजात बच्चे का वजन 1.4 किलोग्राम होता है, देशी सूकरों का मांस भी काफी घटिया किस्म का होता हैं, इसलिए विदेशी नस्ल के सूकर ही पालने चाहिए।

सूकरों के लिए घर बनाते समय सर्दी, गर्मी, वर्षा नमी व सूखे आदि से बचाव का ध्यान रखना चाहिए । सूकरों के घर के साथ ही बाड़े भी बनाने चाहिए । ताकि सूकर बाड़े में घूम-फिर सकें । बाड़े में कुछ छायादार वृक्ष भी होने चाहिए, जिससे अधिक गर्मी के मौसम में सूकर वृक्षों की छाया में आराम कर सकें । सूकरों के घर की छत ढलवां होनी चाहिए और घर में रोशनी व पानी के लिए खुला बनाते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि खुरली गोलाई में हो ताकि राशन आसानी से खाया जा सके । सूकरों के घर का फर्श समय-समय पर साफ करते रहना चाहिए । मादा सूकर वर्ष में दो बार बच्चे देती हैं, सामान्यतया मादा 112 से 116 दिन गर्भावस्था में रहती हैं इस अवस्था में तो विशेष सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन ब्याने से एक महीना पूर्व मादा को प्रतिदिन तीन किलोग्राम खुराक दी जाती है, ताकि मादा की बढ़ती हुई जरूरत को पूरा किया जा सके ।

एक नजर में सूकर  पालन :

सूकर  पालन विश्व के कई देशों में होता है। इसके पालन के मामले में चीन सबसे आगे है। चीन के बाद यूएस, ब्राजील, जर्मनी, वियतनाम, स्पेन, रूस, कनाडा, फ्रांस और भारत हैं। भारत में सुअर उत्पादन आबादी का लगभग 28 प्रतिशत यानी लगभग 14 मिलियन से ज्यादा है। उत्तरपूर्व के राज्यों में सूकर  पालन अधिक होता है। इसके अलावा देश के कई राज्यों में सूकर  पालन किया जाता है।

सूकर पालन की शुरुआत कैसे करें ?

इस व्यवसाय की शुरुआत करने से पहले आवश्यक है कि इसकी पूरी जानकारी हो। इस व्यवसाय में आने वाले खर्च, स्थान का चुनाव, सुअर की प्रजातियों का ज्ञान, व्यापार के जोखिम, पशुओं की बीमारी व बाजार का सही ज्ञान होना आवश्यक है।

सुकर पालन से सम्बंधित विस्तृत जानकारी के लिए ग्रोवेल एग्रोवेट के वेबसाइट पर सुकर पालन से सम्बंधित ढेर सारी किताबें हैं । ये किताबें विश्वविख्यात सुकर पालन के विषेशज्ञों और पशुपालन बैज्ञानिकों द्वारा लिखी गई है । आप इन पुस्तकों को मुफ्त में डाउनलोड कर , अध्यन कर सुकर पालन से सम्बंधित सारी जानकारी ले सकतें  हैं । सुकर पालन से सम्बंधित किताबें इस लिंक से डाउनलोड कर सकतें हैं ।

सूकर पालन के फायदे :

 मांस उत्पादन में दूसरे पशुओं के मुकाबले सूकर  से पर्याप्त मात्रा में मांस प्राप्त हो जाता है। इसका मांस अधिक प्रोटीन वाला होने की वजह से विदेशों में अधिक मांग है।

अधिकतर ऐसा खाना जिसको बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, सुअर पालन के जरिए इस खाने को पोषित मांस के रूप में प्राप्त किया जा सकता है। मादा सूकर  एक बार में 10 से 12 बच्चों को जन्म देती है। मादा साल में तीन बार बच्चों को जन्म देती है।इस व्यवसाय में इनके रहने के स्थान और अन्य सामग्री पर कम निवेश की आवश्यकता होती है।

सूकर  का मांस अच्छी गुणवत्तायुक्त प्रोटीन और पोषक मांस के रूप में जाना जाता है इसलिए भारत के साथ इसकी अन्य देशों में भी मांग है।अच्छी आय के नजरिए से इसके पालन से जल्दी ही 6 से 8 महीनों में अच्छी आमदनी होनी शुरू हो जाती है। ज्ञातव्य रहे कि सूकर के मांस का प्रयोग कैमिकल्स के रूप में जैसे सौन्दर्य प्रसाधन व रासायनिक उत्पादों में प्रयोग होने की वजह से इसकी बहुत मांग है।

सूकर  पालन में आने वाला खर्च:

सुअर पालन की शुरुआत करते समय मुख्य रूप से रहने की व्यवस्था, मजदुर- कर्मचारी , भोजन सामग्री, प्रजनन और दवाओं पर खर्च होता है। यदि कोई व्यक्ति 20 मादा सुअर का पालन करता है तो इस हिसाब से 20 वर्ग गज के लिए 150 रुपए प्रति वर्ग गज के हिसाब से 60,000 रूपए, 2 सुअर के लिए 70 प्रतिवर्ग गज के हिसाब से 25,200 रूपए, स्टोर रूम पर आने वाला खर्च लगभग 30,000 रूपए और लेबर में आने वाला खर्च लगभग 60,000 रूपए सालाना खर्च आता है। यदि देखा जाए तो पहले सालाना खर्च लगभग 2,80,000 रूपए आता है। दूसरे साल में इनके प्रजनन और बच्चों पर आने वाला खर्च लगभग 3,00,000 रूपए के आस-पास आता है। इसके अलावा पहले साल का लाभ लगभग 21,200 रूपए, दूसरे साल का लाभ 7,80,000 रूपए और तीसरे साल 16,50,000 रूपए होता है। आने वाले वर्षों में यह आय इसी क्रम में बढ़ती जाती है। आने वाले खर्च के विपरीत किसान इस व्यवसाय से एक अच्छी आय आर्जित सकते हैं।

सुअर पालन के लिए सरकार द्वारा वित्तीय सहायता :

सुअर पालन के लिए सरकार ऋण भी उपलब्ध करवाती है। इस व्यवसाय की शुरुआत के लिए वैसे तो आने वाला खर्च उनकी संख्या, प्रजाति और रहने की व्यवस्था पर निर्भर करता है। व्यवसाय में आने वाले खर्च के लिए कुछ सरकारी संस्था जैसे नाबार्ड और सरकारी बैंकों द्वारा ऋण सुविधा उपलब्ध है। बैंकों और नाबार्ड द्वारा दिए जाने वाले इस ऋण पर ब्याज दर और समयावधि अलग-अलग होती है। वैसे ऋण पर ब्याजदर 12 प्रतिशत प्रतिवर्ष होती है। इस व्यवसाय के लिए कागजी कार्यवाही के बाद ऋण आसानी से मिल जाता है। हालांकि किसान को निश्चित समयावधि के दौरान लिया गया कर्ज चुकाना होता है। अधिक जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी बैंक अथवा नाबार्ड के कार्यालय से इसकी जानकारी ले सकते हैं।

सुअर पालन प्रशिक्षण संस्थान :

सुअर पालन व्यवसाय करने के पहले उसका प्रशिक्षण लेना आवश्यक है जिससे कि यदि कोई समस्या आती है तो व्यवसायी उससे स्वयं निपटने की क्षमता रखे।अगर आप ग्रोवेल एग्रोवेट के वेबसाइट पर सुकर पालन से सम्बंधित किताबें और लेख अच्छी तरह से पढेंगें और समझेंगें तो आप खुद सुकर पालन से सम्बंधित विशेषज्ञ बन जायेंगें ।

सुअर पालन का प्रशिक्षण देने वाले कई संस्थान हैं। भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद के राष्ट्रीय शूकर अनुसन्धान केंद्र, पशु चिकित्सा विद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा किसानों को समय-समय पर सुअर पालन का प्रशिक्षण दिया जाता है। आचार्य एन.जी. रंगाराव कृषि विश्वविद्यालय, एआईसीआरपी आंध्र प्रदेश, एआईसीआरपी आनंद कृषि विश्वविद्यालय, एआईसीआरपी जबलपुर और आईवीआरआई इज्जतनगर आदि संस्थानों में शोधकार्य होता है।

सूकर की मुख्य प्रजातियाँ :

देश में सूकर  की काफी प्रजातियाँ हैं लेकिन मुख्यतः सफेद यॉर्कशायर, लैंडरेस, हल्का सफेद यॉर्कशायर, हैम्पशायर, ड्युरोक, इन्डीजीनियस और घुंघरू अधिक प्रचलित हैं।

सफेद यॉर्कशायर सूकर:

यह प्रजाति भारत में बहुत अधिक पाई जाती है। हालांकि यह एक विदेशी नस्ल है। इसका रंग सफेद और कहीं-कहीं पर काले धब्बे भी होते हैं। कान मध्यम आकार के होते हैं जबकि चेहरा थोड़ा खड़ा होता है। प्रजनन के मामले में ये बहुत अच्छी प्रजाति मानी जाती है। नर सुअर का वजन 300-400 किग्रा. और मादा सुअर का वजन 230-320 किग्रा के आसपास होता है।

लैंडरेस सूकर :

इसका रंग सफेद, शारीरिक रूप से लम्बा, कान-नाक-थूथन भी लम्बे होते हैं। प्रजनन के मामले में भी यह बहुत अच्छी प्रजाति है। इसमें यॉर्कशायर के समान ही गुण हैं। इस प्रजाति का नर सुअर 270-360 किग्रा. वजनी होता है जबकि मादा 200 से 320 किग्रा. वजनी होती है।

हैम्पशायर सूकर :

इस प्रजाति के सुअर मध्यम आकार के होते हैं। शरीर गठीला और रंग काला होता है। मांस का व्यवसाय करने वालों के लिए यह बहुत अच्छी प्रजाति मानी जाती है। नर सुअर का वजन लगभग 300 किलो और मादा सुअर 250 किग्रा. वजनी होती है।

घुंघरू सूकर :

इस प्रजाति के सूकर  का पालन अधिकतर उत्तर-पूर्वी राज्यों में किया जाता है। खासकर बंगाल में इसका पालन किया जाता है। इसकी वृद्धि दर बहुत अच्छी है।सूकर की देशी प्रजाति के रूप में घुंगरू सूअर को सबसे पहले पश्चिम बंगाल में काफी लोकप्रिय पाया गया, क्योंकि इसे पालने के लिए कम से कम प्रयास करने पड़ते हैं और यह प्रचुरता में प्रजनन करता है। सूकर  की इस संकर नस्ल/प्रजाति से उच्च गुणवत्ता वाले मांस की प्राप्ति होती है और इनका आहार कृषि कार्य में उत्पन्न बेकार पदार्थ और रसोई से निकले अपशिष्ट पदार्थ होते हैं। घुंगरू सूकर प्रायः काले रंग के और बुल डॉग की तरह विशेष चेहरे वाले होते हैं।  इसके 6-12 से बच्चे होते हैं जिनका वजन जन्म के समय 1.0 kg तथा परिपक्व अवस्था में 7.0 – 10.0 kg होता है। नर तथा मादा दोनों ही शांत प्रवृत्ति के होते हैं और उन्हें संभालना आसान होता है। प्रजनन क्षेत्र में वे कूडे में से उपयोगी वस्तुएं ढूंढने की प्रणाली के तहत रखे जाते हैं तथा बरसाती फ़सल के रक्षक होते हैं।

रानी, गुवाहाटी के राष्ट्रीय सूकर अनुसंधान केंद्र पर घुंगरू सूअरों को मानक प्रजनन, आहार उपलब्धता तथा प्रबंधन प्रणाली के तहत रखा जाता है। भविष्य में प्रजनन कार्यक्रमों में उनकी आनुवंशिक सम्भावनाओं पर मूल्यांकन जारी है तथा उत्पादकता और जनन के लिहाज से यह देशी प्रजाति काफी सक्षम मानी जाती है। कुछ चुनिन्दा मादा घुंगरू सूअरों ने तो संस्थान के फार्म में अन्य देशी प्रजाति के सूकर की तुलना में 17 बच्चों को जन्म दिया है।

सूकर का विपणन और बाजार :

वैसे तो भारत और नेपाल में सुकर की मांस की काफी अच्छी मांग है। हालांकि क्षेत्रीय मांग के अलावा विदेशों में भारत से इसके मांस का बड़ी मात्रा में निर्यात किया जाता है। यह ऐसा पशु है जिसके मांस से लेकर चर्बी तक को काम में लिया जाता है। भारत से लगभग 6 लाख टन से ज्यादा सुअर का मांस दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है। इसके मांस का प्रयोग मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधनों और कैमिकल के रूप में प्रयोग होता है इसलिए यह व्यवसाय किसानों के लिए लाभकारी है जिससे वो अच्छा लाभ ले सकते हैं

संकर सूकर पालन संबंधी कुछ उपयोगी बातें:

  • देहाती सूकर से साल में कम बच्चे मिलने एवं इनका वजन कम होने की वजह से प्रतिवर्ष लाभ कम होता है।
  • विलायती सूकर कई कठिनाईयों की वजह से देहात में लाभकारी तरीके से पाला नहीं जा सकता है।
  • विलायती नस्लों से पैदा हुआ संकर सूकर गाँवों में आसानी से पाला जाता है और केवल चार महीना पालकर ही सूकर के बच्चों से 50-100 रुपये प्रति सूकर इस क्षेत्र के किसानों को लाभ हुआ।
  • इसे पालने का प्रशिक्षण, दाना, दवा और इस संबंध में अन्य तकनीकी जानकारी यहाँ से प्राप्त की जा सकती है।
  • इन्हें उचित दाना, घर के बचे जूठन एवं भोजन के अनुपयोगी बचे पदार्थ तथा अन्य सस्ते आहार के साधन पर लाभकारी ढंग से पाला जा सकता है।
  • एक बड़ा सूकर 3 किलों के लगभग दाना खाता है।
  • इनके शरीर के बाहरी हिस्से और पेट में कीड़े हो जाया करते हैं, जिनकी समय-समय पर चिकित्सा होनी चाहिए।
  • साल में एक बार संक्रामक रोगों से बचने के लिए टीका अवश्य लगवा दें।
  • बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सूकर की नई प्रजाति ब्रिटेन की टैमवर्थ नस्ल के नर तथा देशी सूकरी के संयोग से विकसित की है। यह आदिवासी क्षेत्रों के वातावरण में पालने के लिए विशेष उपयुक्त हैं। इसका रंग काला तथा एक वर्ष में औसत शरीरिक वजन 65 किलोग्राम के लगभग होता है। ग्रामीण वातावरण में नई प्रजाति देसी की तुलना में आर्थिक दृष्टिकोण से चार से पाँच गुणा अधिक लाभकारी है।
  • सूकर पालन के लिए जरुरी है एक ऐसे स्थान का चुनाव करना जो थोड़ा खुले में हो और आसानी से इन पशुओं के रहने की व्यवस्था हो सके। यदि 20 सुअर  हैं  तो उनके लिए कम से कम 2 वर्ग मीटर प्रति सुअर रहने का स्थान उपलब्ध हो। साथ ही उनके प्रजनन के लिए स्थान होना आवश्यक है।

दिन में ही सूकर से प्रसवः गर्भ विज्ञान विभाग, राँची पशुपालन महाविद्यालय ने सूकर में ऐच्छिक प्रसव के लिए एक नई तकनीक विकसित की है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ने मान्यता प्रदान की है। इसमें कुछ हारमोन के प्रयोग से एक निर्धारित समय में प्रसव कराया जा सकता है। दिन में प्रसव होने से सूकर के बच्चों में मृत्यु दर काफी कम हो जाती है, जिससे सूकर पालकों को काफी फायदा हुआ है।

सूकर की आहार-प्रणाली :
सूकरों का आहार जन्म के एक पखवारे बाद शुरू हो जाता है। माँ के दूध के साथ-साथ छौनों (पिगलेट) को सूखा ठोस आहार दिया जाता है, जिसे क्रिप राशन कहते हैं। दो महीने के बाद बढ़ते हुए सूकरों को ग्रोवर राशन एवं वयस्क सूकरों को फिनिशर राशन दिया जाता है। अलग-अलग किस्म के राशन को तैयार करने के लिए निम्नलिखित दाना मिश्रण का इस्तेमाल करेः

सूकरों का दाना मिश्रण

दैनिक आहार की मात्रा

  • ग्रोअर सूकर (26 से 45 किलो तक) : प्रतिदिन शरीर वजन का 4 प्रतिशत अथवा 1.5 से 2.0 किलो दाना मिश्रण।
  • ग्रोअर सूकर (वजन 12 से 25 किलो तक) : प्रतिदिन शरीर वजन का 6 प्रतिशत अथवा 1 से 1.5 किलो ग्राम दाना मिश्रण।
  • फिनसर पिगः 2.5 किलो दाना मिश्रण।
  • प्रजनन हेतु नर सूकरः 3.0 किलो।
  • गाभिन सूकरीः 3.0 किलो।
  • दुधारू सूकरी: 3.0 किलो और दूध पीने वाले प्रति बच्चे 200 ग्राम की दर से अतिरिक्त दाना मिश्रण। अधिकतम 5.0 किलो।
  • दाना मिश्रण को सुबह और अपराहन में दो बराबर हिस्से में बाँट कर खिलायें।
  • गर्भवती एवं दूध देती सूकरियों को भी फिनिशर राशन ही दिया जाता है।

सूकर के लिए दवा और टॉनिक : सूकरों को महीने में एक बार, निम्नांकित दवा अवश्य दें ,ये दवाएं १०० % प्रभावकारी है ,इसकी हम गारंटी देतें हैं ।

ग्रोलिवफोर्ट  (Growlive Forte):

प्रति सूकर महीने में ग्रौलिव फोर्ट दस दिनों तक अवस्य दें । ग्रोलिवफोर्ट के अनेको फायेदें हैं । यह दवा सूकरों के लिवर और किडनी को स्वस्थ रखता है और किसी भी लिवर और किडनी से सम्बंधित बीमारी से बचाता है । सूकरों को दस्त और कब्ज की स्थिति में काफी फायदेमंद है और उनका उपचार करता है । सूकरों के खाने की छमता को बढ़ाता है और जो दाना सूकर खातें हैं वो उनके शरीर में तुरंत काम करता है और सूकरों के खाने के खर्चे में कमी आती है । सूकरों के पाचन शक्ति को काफी मजबूत करता है। सूकरों में फ़ीड रूपांतरण अनुपात को बढ़ाता है।सूकरों में दूध बढाने में मदद करता है।ग्रौलिव फोर्ट सूकरों की भूख बढ़ता है और पाचन शक्ति को सुदृढ़ करता है ,जो की सूकरों के वजन को तेजी से बढ़ने में मदद करता है।

अमीनो पॉवर (Amino Power):

प्रति सूकर महीने में अमीनो पॉवर दस दिनों तक अवस्य दें ।अमीनो पॉवर 46 शक्तिशाली अमीनो एसिड, विटामिन और खनिज का एक अनोखा मिश्रण है और इसके उल्लेखनीय परिणाम है। ये दवा पशु डॉक्टरों द्वारा हमेशा देने की सिफारिश की गई है । यह एक सुपर और शक्तिशाली टॉनिक है जो सूकरों के तेजी से वजन बढ़ने, स्वस्थ विकास रोगों प्रतिरोधी के लिए काफी उपयोगी है ।विटामिन , प्रोटीन और सूअरों में पोषण संबंधी विकारों के सुधार के लिए काफी उपयोगी हैं । किसी भी तनाव और बीमारियों के बाद एक त्वरित ऊर्जा बूस्टर के रूप में काम करता हैं ।सूकरों में दूध बढाने में मदद करता है ।

इसके अलावा सूकरों के बाड़ें में नियमित रूप से विराक्लीन का छिड़काव करें ,उनके खाने के नाद को इससे सफाई , इससे फायदा ये होगा की बीमारी और महामारी फैलने का डर काम रहेगा । आप सूकरों के चारे में नियमित रूप से ग्रोवेल का मिक्चर-मिनरल्स Chelated Growmin Forte चिलेटेड ग्रोमिन फोर्ट और Immune Booster (Feed Premix) इम्यून बुस्टर प्री-मिक्स  भी दे सकतें हैं ,इन सभी दवाईयों और टॉनिक देने से फायदा ये होगा की उनका वजन तेजी से बढ़ेगा और आपका खर्च काम और लाभ अधिक होगा ।बस एक बार हमारी सलाह को अपना कर देखें ,आपको फायदा ही फायदा होगा आपके सुकर पालन के ब्यवसाय में।

सूकर पालन का का एक संछिप्त अर्थशास्त्र :

पूरी तरह विकसित सूकर की कीमत 8 हजार रुपये, महज एक नर और एक मादा से कोई भी इस धंधे को शुरु कर सकता है। एक बार में छह या इससे ज्यादा सूकर के बच्चे पैदा होते हैं, इस तरह तीन महीने के अंदर 10 सूअर हो जाता है। सूकर का एक बच्चा करीब ढाई हजार रुपये में बिकता है, पूर्ण विकसित सूकर आठ हजार रुपये में तक बिकता है। दो एकड़ जमीन पर एक बार में 50 सूअर का पालन हो सकता है। एक साल में एक हजार सूअर का उत्पादन कर 30 लाख रुपये कमाई की जा सकती है।कृप्या आप इस लेख को भी पढ़ें  सुअर पालन व्यवसाय

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Growlive Forte
ग्रोलिव फोर्टBuy Now Growel Products.

A Double Power Cattle & Poultry Liver Tonic for preventing hepatic disorders – diseases and better FCR.

Composition: Each 10 ml contains:

Tricholine Citrate : 1500 mg
Protein Hydrolysate : 100 mg
Vitamin B 12 : 4 mcg
Inositol : 10 mg
Methyl Donors : 66 mg
Selenium : 7 mcg
Vitamin -E : 20 mg
Biotin : 6 mcg
Base enriched with liver stimulants- q.s.

Indication & Benefits :

  • A powerful cattle & poultry liver tonic for quick recovery of hepatic disorders & diseases .
  • Stimulates the function of kidneys in maintaining water salt equilibrium.
  • Reduce incidence of Gout, Leechi and Ascites in poultry.
  • To improve poultry egg production, hatch-ability and weight gain.
  • It is working as a supportive therapy in hepatic dysfunction due to hepatic disease i.e. Aflatoxins, Mycotoxins, Lipidosis , Fatty Liver Syndrome. etc.
  • For the treatment of liver dysfunction in poultry & cattle due to parasitic diseases.
  • For the treatment of Diarrhoea or Constipation in animals .
  • To improve cattle feed intake ,milk production and milk fat percentage.
  • To improve growth and liveability in livestock and poultry.
  • It improve feed conversion ratio (FCR) in poultry & cattle.
  • To improve growth and liveability in cattle and poultry.
Dosage :
For 100 Birds :
Broilers : 8-10 ml.
Layers : 10-15 ml.
Breeders : 25-30 ml.
For Cattle:
Cow, Buffalo & Horse : 30-50 ml each animal per day.
Calves : 20-30 ml each animal per day.
Sheep, Goat & Pig : 10-15 ml each animal per day.
Should be given daily for 7 to 10 days, every month or as recommended by veterinarian.

Packaging : 500 m.l., 1 ltr. & 5 ltr.

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poultry growth promoter, goat growth promoter,animal health booster

Amino Power
अमीनो पॉवर

It is an Unique Combination of 46 Powerful Amino Acids, Vitamins & Minerals .It is strongest amino acid for poultry & cattle with a remarkable result and quality.

Composition: Each 100 ml contains:

Histidine: 105 mg
Arginine: 156.6 mg
VITAMINS:
Vitamin A: 280000 IU
Vitamin D 3: 58000 IU
Vitamin E: 427.5 mg
Vitamin K 3: 28.7 mg
Vitamin B 6: 212 mg
Vitamin B 2: 417.5 mg
Vitamin B 1: 375.5 mg
Pantothenic Acid: 1530 mg
Vitamin B 12: 1.5 mg
Choline: 49.8 mg
Biotin: 0.2 mg
Folic Acid: 0.2 mg
Niacin Amide: 1066.7 mg
Vitamin C: 627.5 mg
Inositol: 0.2 mg
AMINO ACIDS
Methionine: 785.5 mg
Lysine: 399.6 mg
Histidine: 105 mg
Arginine: 156.6 mg
Aspartic Acid: 805.5 mg
Threonine: 304.3 mg
Serine: 317.5 mg
Glutamic Acid: 478 mg
Proline: 96.1 mg
Glycine: 712.5 mg
Alanine: 235.2 mg
Cystine: 99.5 mg
Valine: 215.9 mg
Leucine: 355.6 mg
Isoleucine: 225.5 mg
Tyrosine: 295.3 mg
Phenylalanine: 211.3 mg
Tryptophan: 54.8 mg
Lactic acid bacillus: 5526555 cfu
Yeast Extract: 600 mg
TRACE MINERALS:
Sodium Chloride: 153.8 mg
Manganese Sulphate: 124.9 mg
Magnesium Sulphate: 65.7 mg
Sodium Bicarbonate: 124.5 mg
Calcium Hypophosphite: 40.9 mg
Copper Sulphate: 150 mg
Potassium Chloride: 101.5 mg
Selenium: 50.2 mg
Sodium Citrate: 161 mg

Indication & Benefits :

  • A super & powerful tonic for faster & healthy growth ,diseases resistance,immunity building in poultry & cattle .
  • A complete tonic with Vitamins, Amino Acids & Minerals for poultry & cattle.
  • For correction of Vitamin ,Protein & Minerals nutritional disorders  in poultry & cattle.
  • Prevents early chicks mortality & infections .
  • For peak production, for egg mass, body weight and fertility.
  • It Improves egg production and overcome stress & mineral deficiency.
  • As an Instant energy booster after any stress & diseases.
  • It improves FCR & lowered feed cost in poultry & cattle.
  • For making DNA & RNA. and to maintain metabolism & health of the body cells.
  • It is very useful for better intestinal microflora management.
  • For the faster & healthy growth of Poultry,Calf and Goat.
  • Increases milk production & quality of milk in cattle.
  • Highly recommended animal tonic by veterinarian for poultry & cattle.
Dosage :
For 100 Birds:
Broilers : 10-15 ml.
Layers : 15-20 ml.
Breeders : 15-20 ml.

For Cattle:
Cow, Buffalo & Calf : 50 ml daily in the morning & evening.
Goat & Pig: 20 ml daily in the morning & evening.
Should be given daily for 10 days, every month or as recommended by veterinarian.

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15 Comments

  1. क्या इसकी बिक्री का कोई स्थान हो तो जर्रोर ब्बतए क्योंकि इसकी बिक्री कहा हॉग सकती है

  2. Sir me sukar pig palan karta hua. But kae baar mere sukar bimari ki chapet me aakar mar jaate hai. Kyon saal me do par sukar hanfate he sans ki bimari aadi. 4-5 din ke andar mar jate hai. Ham madicen bhi dete monocef injection par Koi fark nahi hota. Please sir aap koe upay bataeye.

  3. क्रपया मै सूअर पालन करना चाहता हूॅ
    प्रति सूअर लागत खच॔ व चारा खच॔ 1 kg से 100 kg तक व दवाइयों का खच॔

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